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कब तक बचेगा फोटोग्राफी का जनक कोडक

७ जनवरी २०१२

सौ साल पहले फोटोग्राफी को आम लोगों तक पहुंचाने वाला इस्टमैन कोडक का भविष्य धुंधला लगने लगा है. शेयर बाजार में तेजी से गिरने के बाद खबरें आ रही है कि परंपरागत कंपनी दिवालिया होने के कगार पर है.

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नई खोजों की रेस में पीछे छूटने से क्या होता है, इसका एक उदाहरण कोडक भी है जो डिजीटल लहर में अपने फिल्म बिजनेस के बह जाने के बाद फिर से पैर पर खड़ा होने में विफल रहा है. वॉल स्ट्रीट जर्नल ने खबर दी है कि कोडक ने अपने बैंकों से इस बारे में बातचीत शुरू कर दी है. मंगलवार को न्यूयॉर्क स्टॉक एक्सचेंज ने कंपनी को बताया कि यदि वह कंपनी के शेयरों की कीमत 1 डॉलर के स्तर पर वापस नहीं ला पा है तो उसे लिस्ट से निकाल दिया जाएगा. कभी वह डाव जोंस की 30 सर्वोत्तम ब्लू चिप्स कंपनी में शामिल थी.

अपने चढ़ाव पर कोडक के शेयरों की कीमत 1996 में 80 डॉलर तक पहुंच गई थी. यह वह समय था जब डिजीटल क्रांति शुरू हो रही थी जिसने फोटोग्राफी के लिए कोडक की फिल्में खरीदने की जरूरत धीरे धीरे समाप्त कर दी. कोडक का कभी अमेरिकी बाजार पर वर्चस्व हुआ करता था. बुधवार को उसके एक शेयर की कीमत 28 फीसदी गिरकर 47 सेंट पर आ गई. गुरुवार को मूडी ने उसकी क्रेडिट रेटिंग गिराकर सीएए3 कर दी. उसके बाद शेयरों की कीमत 10 प्रतिशत और गिरी तथा 42 सेंट प्रति शेयर हो गई.

Photokina in Köln 2006 Kodak
तस्वीर: DW

कंपनी की स्थिति इतनी खराब होती जा रही है कि पिछले दो सप्ताह में तीन तीन डाइरेक्टरों के इस्तीफे के बाद गुरुवार को कोडक के मुख्य सूचना अधिकारी ने भी इस्तीफा दे दिया. वाल स्ट्रीट जरनल का कहना है कि कोडक अपने कुछ कीमती पैटेंट को बेचकर पैसा जुटाना चाहती है. लेकिन यदि अंतिम प्रयास विफल हो जाते हैं तो कंपनी इस महीने के अंत में फरवरी में सुरक्षा के लिए दिवालिया होने का आवेदन दे सकती है. यह आवेदन कंपनी के 19,000 कर्मचारियों का भविष्य दांव पर लगा देगा. 1980 में वहां लगभग डेढ़ लाख लोग काम करते थे.

कोडक ने इन खबरों पर टिप्पणी करने से मना कर दिया है. कंपनी पिछले कई सालों से घाटे में चल रही है. पिछली बार उसे 2007 में छोटा मुनाफा हुआ था. 1892 में खोजी जॉर्ज इस्टमैन ने कंपनी की स्थापना की थी. कोडक ने हाथ में रखा जाने वाला ब्राउनी कैमरा बनाया जिसे सस्ते दामों पर आम लोगों में बेचा गया. इसके अलावा वह फिल्म भी बनाती थी जिससे काफी मुनाफा होता था. अमेरिका और दूसरे देशों के लोग तीन पीढ़ियों तक ब्राउनी से तस्वीरें खींचते रहे. इसे देश का प्रमुख आविष्कारक बताया गया. अपने समय का एप्पल और गूगल.

मजेदार बात यह रही कि कोडक ने ही 1970 के दशक में डिजीटल फोटोग्राफी में शोध की शुरुआत की. लेकिन 1990 में बाजार में एशियाई इलेक्ट्रॉनिक निर्माताओं ने बाजी मार ली, क्योंकि कोडक ने अपने परंपरागत कारोबार को छोड़ने से इंकार कर दिया. डिजीटल कैमरा का आविष्कार करने वाला ही दौड़ में पिछड़ गया क्योंकि उसे अपनी खोज पर भरोसा नहीं था.

रिपोर्ट: एएफपी/महेश झा

संपादन: आभा एम