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चीफ़ को चुनौती, संकट को बुलावा: राजनाथ

२० दिसम्बर २००९

भारतीय जनता पार्टी के अध्यक्ष पद से हटने के एक दिन बाद राजनाथ सिंह ने कहा है कि अगर पार्टी अध्यक्ष को चुनौती दी जाती है तो फिर संकट को नहीं टाला जा सकता. राजनाथ ने अरुण जेटली के साथ मतभेदों से इनकार किया है.

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अध्यक्ष पद से विदाईतस्वीर: Fotoagentur UNI

राजनाथ ने कहा कि पार्टी की बागडोर अब नए अध्यक्ष नितिन गडकरी के हाथों में हैं और अगर उन्हें चुनौती दी जाती है तो पार्टी में संकट पैदा होना निश्चित है. इशारों में अपनी बात कह रहे राजनाथ सिंह ने यह भी जोड़ा कि न तो ऐसा बीजेपी में अब तक हुआ है और न ही आने वाले दिनों में होगा.

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नितिन गडकरीतस्वीर: cc-by-sa-Manasrajdhar

मीडिया में ऐसी चर्चा रही है कि बीजेपी में अरुण जेटली के साथ राजनाथ की अनबन थी लेकिन राजनाथ इस बात से कन्नी काट गए. उन्होंने कहा कि बीजेपी खेमों में बंटी हुई पार्टी नहीं है.

राजनाथ सिंह के पार्टी अध्यक्ष के कार्यकाल में बीजेपी की लोकसभा चुनाव में करारी हार हुई थी. राजनाथ ने माना कि चुनाव नतीजे पार्टी की उम्मीदों के अनुरूप नहीं थे. "अगर लोकसभा में हमारा बहुमत होता तो निश्चित रूप से एलके आडवाणी देश के प्रधानमंत्री बनते. मुझे हमेशा इस बात का अफ़सोस रहेगा कि ऐसा नहीं हो सका."

राजनाथ ने उम्मीद जताई कि अटल बिहारी वाजपेयी के स्वास्थ्य में सुधार होने पर वह पार्टी में सक्रिय भूमिका निभाएंगे जबकि आडवाणी अभी भी सक्रिय हैं और आने वाले समय में भी रहेंगे.

इस बीच पार्टी के नए अध्यक्ष नितिन गडकरी ने एलके आडवाणी से मुलाक़ात कर उनसे आशीर्वाद और समर्थन मांगा है. गडकरी ने कहा है कि राष्ट्रीय राजनीति में वह नए हैं लेकिन पार्टी के वरिष्ठ नेताओं के आशीर्वाद से उन्हें विश्वास है कि वह अपनी ज़िम्मेदारी सही से निभाएंगे. गडकरी के मुताबिक़ वाजपेयी और आडवाणी उनके लिए प्रेरणास्त्रोत रहे हैं. वाजपेयी से गडकरी ने शनिवार को मुलाक़ात की थी.

रिपोर्ट: एजेंसियां/एस गौड़