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नया नाम, नया घर...बुसान फेस्टिवल बढ़िया है

७ अक्टूबर २०११

एशिया के सबसे अहम फिल्म महोत्सवों में शुमार बुसान फिल्म फेस्टिवल में इस साल की पहली फिल्म चार्ली चैपलिन की याद दिलाती है. दक्षिण कोरियाई डायरेक्टर सोंग इल-गोन की फिल्म ऑलवेज में प्रेरणा चैपलिन की सिटी लाइट्स है.

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तस्वीर: AP

दक्षिण कोरिया के बुसान शहर में गुरुवार को शुरू हुआ एशिया का सबसे बड़ा फिल्म फेस्टिवल इस बार अपने स्थायी घर में हो रहा है. 16 साल के हो चुके इस फेस्टिवल के लिए 14 करोड़ यूरो की लागत से बुसान सिनेमा सेंटर बनाया गया है. यहां सबसे पहले सोंग की फिल्म ऑलवेज दिखाई गई.

चार्ली चैपलिन और सोंग

सोंग ने कहा कि उनकी फिल्म भी एक उजड़े से शहर में रहते दो अकेले इन्सानों के प्रेम कथा है, ठीक वैसे ही जैसे 1931 में आई चैपलिन की फिल्म सिटी लाइट्स में थी. सिटी लाइट्स एक गरीब बेचारे से लड़के और फूल बेचने वाली लड़की की मूक कहानी थी जिसे सिर्फ काले और सफेद रंगों में दिखाया गया. ऑलवेज में रंग हैं. और कहानी है एक बॉक्सर और एक टेलीफोन ऑपरेटर की. दोनों में एक साझी बात है कि लड़की अंधी है और उसे अपने प्रेमी के बलिदान से रोशनी वापस मिल जाती है.

Bollywood Schauspielerin Ashwarya Rai bei der Pemiere von Jodha Akbar
तस्वीर: AP

सो जी-सुब इस फिल्म में बॉक्सर की भूमिका में हैं. वह कहते हैं कि उन्होंने और सोंग ने फिल्म बनने के दौरान जाना कि कैसे असंभव से दिखने वाले रिश्तों में भी प्यार पनपने की गुंजाइश होती है. 34 साल के दक्षिण कोरियाई एक्टर सो कहते हैं, "हमने ऐसे ही प्यार की ईमानदारी और अपनेपन को कहने की कोशिश की है."

सो के साथ लड़की की भूमिका में 25 साल की एक्टर हान ह्यो-जू हैं. उन्हें इस बात की बेहद खुशी है कि उनकी फिल्म से बुसान फिल्म फेस्टिवल की शुरुआत हो रही है.

कई कई नई बातें

बुसान फिल्म फेस्टिवल में इस बार कई अहम और नई बातें हो रही हैं. एक तो इसका नया घर जिसे मशहूर ऑस्ट्रियाई आर्किटेक्चर कंपनी कूप हिमेलब्लाऊ ने डिजाइन किया है. 30 हजार वर्ग मीटर में फैले इस सेंटर में चार हजार सीटों वाला आउटडोर थिएटर भी बनाया गया है. इसके अलावा चार इनडोर स्क्रीन हैं.

दूसरी नई चीज है फेस्टिवल का नाम. दक्षिण कोरिया के दूसरे सबसे बड़े शहर में होने वाले इस फेस्टिवल का नाम बदल गया है. पहले इसे पुसान इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल के नाम से जाना जाता था. लेकिन इस साल से इसने अपना नाम बुसान रख लिया है क्योंकि शहर का नाम बदल गया है. इसका फायदा यह होगा कि अब लोग पीआईएफएफ यानी उत्तर कोरिया के प्योंगयांग इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल में और बीआईएफएफ में फर्क कर सकेंगे.

Südkorea Filmfestival in Busan
तस्वीर: AP

इस साल से बीआईएफएफ का नेतृत्व भी बदल गया है. 15 साल तक इसका कामकाज देखने वाले सरकारी अधिकारी किम दोंग-हो की जगह अब ली योंग-क्वान निदेशक होंगे. किम ने पिछले साल स्वास्थ्य कारणों से पद छोड़ दिया था.

नए निदेशक के पास नए घर और नए नाम के साथ साथ नई योजनाएं भी हैं. वह चाहते हैं कि बीआईएफएफ के सिनेमा सेंटर को पूरा साल अच्छा सिनेमा दिखाने के लिए इस्तेमाल किया जाए और इसका नाम हो. उन्होंने कहा, "बीआईएफएफ की भूमिका फेस्टिवल के दायरों के बाहर भी होगी."

क्या क्या होगा बुसान में

इस साल बुसान में 70 देशों की 307 फिल्में दिखाई जाएंगी. इनमें से 135 फिल्मों का तो प्रीमियर शो होगा. खास कार्यक्रमों में पश्चिमी सिनेमा पर एशियाई निर्देशकों की राय और आधुनिक कोरियाई सिनेमा की चर्चा होगी.

ऑलवेज से शुरू होकर फेस्टिवल जापान के निर्देशक मासातो हारादा की फिल्म क्रॉनिकल ऑफ माई मदर पर पूरा होगा. इस बीच फ्रेंच निर्देशक लुक बेसाँ की द लेडी का भी प्रचार होगा जो म्यांमार की नेता आंग सान सू ची पर बनी है. एक्ट्रेस इसाबेले हुपर्ट भी अपनी फिल्म माई लिटल प्रिंसेस का प्रचार करती दिखेंगी.

भारत की तरफ से

भारत की तरफ से 16वें बुसान इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल में गुजारिश फिल्म दिखाई जाएगी. रितिक रोशन और ऐश्वर्या राय की इस फिल्म का निर्देशन संजय लीला भंसाली ने किया है और भारत में यह फिल्म फ्लॉप रही थी.

निर्देशक संतोष सिवान की उर्मी, सुमन घोष की नोबेल थीफ, अमोल गुप्ते की स्टेनली का डिब्बा भी दिखाई जाएंगी. माधव रामदासन की द अड्रेस, गुरविंदर सिंह की एल्म्स फॉर अ ब्लाइंड होर्स और उमेश विनायक कुलकर्णी की द टेंपल भी अ विंडो ऑन एशियन सिनेमा भारत का प्रतिनिधित्व कर रही हैं. इस विंडो में एशिया की 49 फिल्में दिखाई जानी हैं. तनिष्ठा चटर्जी की फिल्म देख इंडियन सर्कस पुरस्कार जीतने के लिए मुकाबले में शामिल हो रही है.

रिपोर्टः एपी/एएफपी/वी कुमार

संपादनः ए कुमार

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