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लुफ्थांसा के केबिन स्टाफ ने की स्ट्राइक

२८ अगस्त २०१२

एयर इंडिया की लम्बी हड़ताल जैसे हालात जर्मनी में भी बन गए हैं. जर्मनी की सबसे बड़ी एयरलाइन कंपनी लुफ्थांसा के केबिन कर्मचारियों ने मंगलवार को स्ट्राइक की घोषणा की है.

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तस्वीर: picture-alliance/dpa

लुफ्थांसा के एक प्रवक्ता ने कहा कि तेरह महीने से कर्मचारी यूनियन यूएफओ के साथ चल रही बातचीत बिना किसी नतीजे के स्थगित हो गयी है. यूएफओ लुफ्थांसा के करीब 18 हजार केबिन कर्मचारियों का प्रतिनिधित्व करता है. यूनियन के अध्यक्ष निकोलाय बॉबलीस ने पत्रकारों से कहा, "आज से हमने लुफ्थांसा के खिलाफ औद्योगिक कार्रवाई करने का फैसला किया है." यूएफओ ने अभी स्ट्राइक के बारे में अधिक जानकारी नहीं दी है, लेकिन बॉबलीस ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि वह अनिश्चितकालीन हड़ताल की तैयारी कर रहे हैं.

लुफ्थांसा ने 3500 कर्मचारियों के कॉन्ट्रेक्ट रद्द कर दिए हैं. यह लुफ्थांसा के कुल 1,17,000 कर्मचारियों का तीन प्रतिशत है. यूनियन की मांग है कि इन्हें वापस लिया जाए और सभी कर्मचारियों के वेतन में पांच फीसदी की बढ़ोतरी की जाए. इसी महीने कर्मचारियों के बीच कराए गए एक मतदान में पाया गया कि 97.5 प्रतिशत हड़ताल के पक्ष में हैं ताकि प्रबंधन पर दबाव बनाया जा सके.

केबिन स्टाफ की इस स्ट्राइक के कारण जर्मनी और यूरोप की अधिकतर उड़ानें रद्द करनी पड़ी हैं. अब तक आ रही सूचना के अनुसार अंतरराष्ट्रीय उड़ानों पर हड़ताल का असर नहीं पड़ा है. लुफ्थांसा ने कहा है कि यूनियन से बातचीत के बाद यात्रियों को जल्द ही सूचित किया जाएगा.

यह हड़ताल ऐसे समय में आई है जब कंपनी पहले ही नुकसान झेल रही है. 2011 में लुफ्थांसा ने 11.4 करोड़ यूरो का मुनाफा कमाया, लेकिन इस साल की दूसरी तिमाही में हालत सुधरने के बावजूद पिछले छह महीनों में कंपनी को दो करोड़ यूरो का नुकसान हो चुका है. 2010 में लुफ्थांसा के पायलट चार दिन की हड़ताल पर गए थे. उस समय कंपनी को प्रतिदिन ढाई करोड़ यूरो का नुकसान उठाना पड़ा था. कंपनी के अनुमान के अनुसार इस हड़ताल से हर रोज कई करोड़ यूरो का नुकसान होगा.

आईबी/एमजे (एएफपी/डीपीए/रॉयटर्स)

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