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लेंस करेगा डायबिटीज में मदद

१७ जनवरी २०१४

गूगल लैब्स ने एक बार फिर तकनीक का एक अजूबा पेश किया है. वह ऐसे कॉन्टैक्ट लेंस बाजार में ला रहा है जो शरीर में चीनी की मात्रा बता सकेंगे, वह भी आंसुओं के जरिए.

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तस्वीर: picture-alliance/dpa

आंखों में लगा लेंस बता सकता है कि दवा लेने का समय हो गया है, या अभी मीठा न खाएं क्योंकि शरीर में चीनी की मात्रा बढ़ रही है. इस प्रोजेक्ट का नेतृत्व कर रहे ब्रायन ओटिस और बेबाक परवीज ने अपने ब्लॉग में लिखा, "हम स्मार्ट कॉन्टैक्ट लेंस को टेस्ट कर रहे हैं, जो आंसुओं में ग्लूकोज की मात्रा का पता लगा सकेगा."

उन्होंने लिखा है कि लेंस में एक छोटी सी वायरलेस चिप लगी होगी और लेंस की दो परतों की बीच ग्लूकोज सेंसर होगा. ब्लॉग में कहा गया है कि लेंस के नमूनों के टेस्ट हो चुके हैं और अमेरिका के खाद्य और चिकित्सा संस्थान एफडीए से इस बारे में बातचीत चल रही है. यह प्रोजेक्ट अभी शुरुआती चरण में है और इसे बाजार में लाने के लिए साझेदार खोजे जा रहे हैं.

गूगल एक्स लैब के एक सदस्य ने कहा, "आप सोच ही सकते हैं, आंसुओं को जमा करना और उन पर शोध करना कोई आसान काम नहीं. हमने सोचा कि बहुत ही छोटे इलेक्ट्रॉनिक्स बनाएं, ऐसे सोचने वाले चिप्स और सेंसर बनाएं, जिनका ऐंटीना इंसानी बाल से भी पतला हो. शायद यह एक तरीका हो इंसानी आंसुओं में ग्लूकोज की मात्रा की गुत्थी को सुलझाने का."

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लेंस आंसुओं में ग्लूकोज की मात्रा का पता लगा सकेगा.तस्वीर: fotolia/Mikael Damkier

पांच साल और

ये लेंस हर सेकंड ग्लूकोज की मात्रा परख सकेंगे. वैज्ञानिक कोशिश कर रहे हैं कि लेंस में ऐसी लाइटें लगाई जा सकें जो ग्लूकोज की मात्रा सामान्य से कम और ज्यादा होने पर जल पड़ें. ब्लॉग में ओटिस और परवीज ने लिखा है, "हम हमेशा से कहते आए हैं कि हम ऐसे प्रोजेक्ट करना चाहते हैं जो थोड़े अजीब और हैरान करने वाले हों."

उन्होंने लिखा है कि ऐसे समय में जब अंतरराष्ट्रीय मधुमेह संघ कहने लगा है कि दुनिया डायबिटीज के आगे "जंग हारने लगी है", हमें लगा कि इस तरह के प्रोजेक्ट की जरूरत है. दुनिया भर में हर 19 में से एक व्यक्ति मधुमेह का शिकार है. भारत और अमेरिका में डायबिटीज के मामले लगातार बढ़ रहे हैं और यह एक लाइफस्टाइल से जुड़ी बीमारी बन चुका है.

गूगल पिछले डेढ़ साल से इस पर काम कर रहा है और उसका कहना है कि कॉन्टैक्ट लेंस बाजार में आने में अभी पांच साल का वक्त लगेगा.

गूगल लैब ने ही बिना ड्राइवर वाली कार और गूगल ग्लासेस का भी प्रयोग किया है. गूगल ग्लासेस को ले कर बाजार में काफी हलचल है. ये ऐसे चश्मे हैं जिन्हें लगा कर इन्हीं के अंदर फिल्में देखी जा सकती हैं. इन्हें टेस्ट करने के लिए पिछले दिनों गूगल ने कुछ लोगों में इन्हें बांटा था. अमेरिका में इनका इस्तेमाल करते हुए गाड़ी चलाती एक महिला का चालान काटा गया. अदालत ने अब इस महिला पर लगे आरोप वापस ले लिए हैं और कहा है कि जिस वक्त चालान हुआ वह चश्मे में फिल्म नहीं देख रही थी.

आईबी/एजेए (एएफपी, रॉयटर्स)

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