1. कंटेंट पर जाएं
  2. मेन्यू पर जाएं
  3. डीडब्ल्यू की अन्य साइट देखें

बाल शोषण पर बर्लिन में बैठक

२३ अप्रैल २०१०

जर्मनी में लगभग तीन महीने पहले बोर्डिंग स्कूल में बच्चों के शोषण के मामले सामने आए थे. मामले को लेकर एक सम्मेलन का आयोजन किया जा रहा है. बात होगी पीड़ितों को मुआवज़े की और शोषण को लेकर जानकारी बढ़ाने की.

https://p.dw.com/p/N4ve
मंत्रियां श्नारेनबेर्गर, श्रोएडर और शावानतस्वीर: picture alliance / dpa

जर्मनी में लगभग तीन महीने पहले बर्लिन के एक बोर्डिंग स्कूल में बच्चों के शोषण के मामले सामने आए थे. मामले को लेकर जर्मनी की राजधानी बर्लिन में एक गोलमेज़ सम्मेलन का आयोजन हो रहा है जिसमें बुद्धिजीवियों, चर्च के प्रतिनिधियों और राजनीतिज्ञों सहित 60 लोग हिस्सा ले रहे हैं.

बाल शोषण के मामलों को लेकर जर्मनी के कैथोलिक गिरजाघर जनता के गुस्से का निशाना बन गए हैं. लेकिन असल विवाद केवल शोषण का नहीं है, जैसा कि कैथलिक धर्मशास्त्री हेरमान हारिंग कहते हैं," शोषण में विवाद की बात नहीं है, शोषण तो विवादास्पद है ही. लेकिन मुद्दा यह है कि इतने वर्षों और दशकों से इसे दबा दिया गया है और पीड़ितों को अनदेखा कर दिया गया है."

Kruzifix / Kreuz / Kirche / NO-FLASH
चर्चों में शोषण की समस्यातस्वीर: AP

हाल में जर्मन न्याय मंत्री ज़ाबीने लॉयटहॉयज़र श्नारेनबैर्गर ने एक सम्मेलन करवाने का प्रस्ताव रखा था, जिसमें केवल चर्चों के अधिकारियों के साथ शोषण के मामलों, उनकी ज़िम्मेदारी और दुराचार की घटनाओं को लेकर चर्चों की गोपनीयता का विश्लेषण होता. चर्चों ने इस प्रस्ताव को खारिज कर दिया जिसके बाद आज शिक्षा मंत्री आनेटे शावान और परिवार कल्याण मंत्री क्रिस्टीना श्रोएडर के प्रतिनिधित्व में बैठक का आयोजन किया जा रहा है. इसमें राजनीतिज्ञों, बुद्धिजीवियों और कैथोलिक चर्च के प्रतिनिधियों के अलावा जर्मन सरकार में शोषण पीड़ितों की आयुक्त क्रिस्टीने बैर्गमान भी हिस्सा ले रही हैं. परिवार कल्याण मंत्री क्रिस्टीना श्रोएडर ने बैठक के मकसद के बारे में कहा,"मैं चाहती हूं कि बैठक के अंत में इस मुद्दे से संबंधित संस्थाओं को उनकी ज़िम्मेदारियां समझ आएं, किस तरह वे यौन शोषण का सामना कर सकते हैं, और अगर उनके आसपास यौन शोषण होने के संकेत हों, तो वे इसके ख़िलाफ़ क्या कर सकते हैं."

न्याय मंत्री लॉयटहॉयज़र-श्नारेनबैर्गर ने ज़िम्मेदार संस्थानों द्वारा पीड़ितों के लिए मुआवज़ों की बात की है. उनका कहना है कि अतीत में हुए शोषण के लिए पीड़ितों ने डॉक्टरों और मनोवैज्ञानिकों की मदद ली होगी. मुआवज़े से कम से कम उनकी परेशानी को मान्यता दी जा रही हैः" कई पीड़ित मुआवज़ों की उम्मीद नहीं रखते लेकिन वे चाहते हैं कि लोग अतीत में उनकी व्यथा को किसी तरह की मान्यता दें. और इसलिए हमें बात करनी होगी, कि हम आर्थिक रूप में मदद दें, सलाह के लिए, मनोवैज्ञानिकों के साथ इलाज के लिए. और इसलिए यह इस बैठक में एक मुद्दा है."

लॉयटहॉयज़र-श्नारेनबैर्गर के प्रतिनिधित्व में विशेषज्ञ पीड़ितों के शोषण को हर तरह से मान्यता देने पर चर्चा करेंगे. इसमें मुआवज़े की भी बात होगी. परिवार कल्याण मंत्री श्रोएडर की प्रमुखता में एक पैनल शोषण के रोकथाम, घटना होने पर कार्रवाई और जानकारी के प्रचार को लेकर रणनीति पर विचार करेंगे.

रिपोर्टः एजेंसियां/ एम गोपालकृष्णन संपादनः महेश झा