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एशिया पर नजर लगाए फेसबुक

१६ मई २०१२

पश्चिमी देशों में फेसबुक प्रसार की सीमा पर पहुंच चुका है और अब कंपनी मुनाफे के लिए एशियाई ग्राहकों पर निर्भर है. एशियाई में फेसबुक के अब एक अरब से ज्यादा ग्राहक हैं.

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तस्वीर: Reuters

समाज पर फेसबुक का प्रभाव काफी दिखाई देने लगा है. इसकी वजह से देशों के भीतर और विदेश में लोग मिल सके हैं और इसके जरिए रूढ़ीवादी विचारधाराओं और समाज में परिवर्तन करने के लिए क्रांतियों भी संभव हुई हैं. फेसबुक के प्रमुख मार्क जुकरबर्ग अब अपनी कंपनी के शेयर बाजार में ला रहे हैं और एशिया से उन्हें ढेर सारी उम्मीदें हैं. पिछले छह महीनों में भारत में फेसबुक 20 प्रतिशत बढ़ा है. जापान में 65 प्रतिशत और सदस्यों ने फेसबुक में अपना अकाउंट बनाया और कोरिया में यह संख्या 56 प्रतिशत है.

भारत में कुल चार करोड़ 50 लाख लोग और इंडोनेशिया में चार करोड़ 20 लाख लोग फेसबुक के आदी हो चुके हैं. विश्व भर में अमेरिका और ब्राजील के बाद भारत और इंडोनेशिया का नाम आता है.

क्यों है एशिया अहम

प्रचार कंपनी ओजिल्वी एंड मैथर के टॉम क्रैंपटन कहते हैं, "फेसबुक के लिए एशिया बहुत अहम है. और जहां तक फेसबुक के भविष्य का सवाल है, उसके लिए एशिया और भी जरूरी है." एशिया में फेसबुक ने माइस्पेस और फ्रेंडस्टर जैसी सोशल नेटवर्किंग साइट्स को बाजार से लगभग पूरी तरह बाहर कर दिया है. विश्लेषक मानते हैं कि एशियाई देशों में कई नागरिक विदेशों में रहते हैं और उन्हें अपने परिवारों और अपने देश से संपर्क में रहना होता है. देश के बारे में जानकारी हासिल करने के लिए भी फेसबुक एक अहम जरिया है.

साथ ही सोशल नेटवर्किंग आम मीडिया के बाहर एक नया विकल्प पेश करता है. फेसबुक पर बोलने की आजादी का अच्छा इस्तेमाल कर रहे लोगों ने सिंगापुर में चुनाव के दौरान सत्ताधारी पार्टी के खिलाफ अपनी आशंकाएं जताईं. मेलेशिया में फेसबुक और इस तरह की सामाजिक साइट के जरिए लोगों ने लोकतांत्रिक प्रदर्शनों का आयोजन किया. एक सर्वे के मुताबिक मेलशिया के यूजर के औसतन सबसे ज्यादा दोस्त होते हैं. हाल ही में देश के प्रधानमंत्री नजीब रजाक ने अपने देश में कुछ सख्त कानूनों को खत्म करने की बात कही है.

मौके भी, मुश्किलें भी

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तस्वीर: AP

बाजार शोध कंपनी नील्सन की सामाजिक मीडिया शाखा एनएम इनसाइट में काम कर रहे यासिर यूसुफ का कहना है कि सिंगापुर और मलेशिया में घटनाओं से पता चला है कि फेसबुक के जरिए कई लोगों ने अपनी भावनाएं व्यक्त कीं और अपने मुद्दों के लिए साथ खड़े हुए. चीन में हालांकि फेसबुक और पश्चिमी देशों की सामाजिक नेट्वर्किंग कंपनियों को पूरी तरह ब्लॉक किया गया है लेकिन चीन में इनके जैसे ही और वेबसाइटें चल रही हैं और इससे सरकार पर दबाव बढ़ाना आसान हो गया है. इंडोनेशिया में भी लोगों ने मुस्लिम रूढ़िवादी विचारों के बारे में अपनी प्रतिक्रिया फेसबुक के जरिए देना शुरू किया है.

लेकिन एशिया में विकास के बावजूद वहां की जमीनी सच्चाई कुछ बाधा डाल रही है. भारत में मूलभूत संरचना की कमी है और ज्यादातर लोगों के पास अब भी इंटरनेट सुविधा नहीं है. लेकिन नील्सेन कंपनी के मुताबिक भविष्य के लिए ऐसे ही बाजारों पर ध्यान देना होगा जिनमें विकास करने की क्षमता है. हाल के एक शोध में पता चला है कि थाइलैंड, फिलिपींस और वियतनाम जैसे देशों में युवा पश्चिमी देशों के युवाओं के मुकाबले इंटरनेट पर ज्यादा वक्त बिताते हैं. फेसबुक के लिए यह एक बढ़ते बाजार और नए मौके का संकेत है.

एमजी/एएम (एपी)